#Muktak by Mamchand Agrwal Vasant

वसंत की कलम से-

 

सौरभ फैलेगा बेटी का,सच्चा सुख जग पाएगा।

तभी बचेगी धार कलम की,कवि भी कुछ रच पाएगा।

लक्ष्मी, दुर्गा, सरस्वती की,होगी तब साकार कल्पना-

बचें बेटियाँ,पढें बेटियाँ,तब समाज बच पाएगा।

-मामचंद अग्रवाल वसंत

09334805484

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