#Muktak by Mamchand Agrwal

वसंत की कलम से

दोहे

मानवता को भूल कर,जो जपते हरिनाम।

धरती पर वे भार हैं, उन्हें उठा ले राम।।

 

धन-दौलत को भूल पर,मानवता मत भूल।

जग को सुरभित कर रहा,मानवता का फूल।।

 

मानव,मानव एक हैं, जाति,धर्म सब व्यर्थ ।

मानवता को भूल कर,करते लोग अनर्थ।।

 

मानव ही इस जगत का सच्चा पहरेदार।

मानवता भूले अगर,बचे  नहीं संसार।।

 

दया,प्यार, करुणा,क्षमा,मानवता का सार।

हिंसा से संसार का,कभी न बेड़ा पार।।

 

मानव को संसार में,हो मानव से प्यार।

मानवता का यह चमन,रहे तभी गुलजार।।

-मामचंद अग्रवाल वसंत

सीमा वस्त्रालय,राजा मार्केट, डिमना रोड,मानगो

जमशेदपुर

09334805484

 

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