#Muktak by Manish Soni

दरख्त के सूखे पत्ते ही झरे नहीं हैं अभी,

जो भी मिले हमें वो खरे उतरे नहीं हैं अभी,

ऐ जिंदगी !! प्लीज़, न देना अब कोई नया जख्म…….

जो भी दिये हैं वो ही भरे नहीं हैं अभी !!!!  #__मनीषसोनी

 

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