#Muktak by Manish Soni

 

सौ-सौ तरह के लोग खुद में भरे है ये दुनिया,

रंजो-गम तमाम पैदा करे है ये दुनिया,

सबकी अपनी ढपली और सबका अपना राग है…

अपनी तो समझ से ही परे है ये दुनिया ||

___मनीष

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