#Muktak by Mithilesh Rai, Mahadev

मैं यादों का कभी कभी जमाना ढूँढता हूँ!
मैं ख्वाबों का कभी कभी तराना ढूँढता हूँ!
जब खींच लेती है मुझको राह तन्हाई की,
मैं अश्कों का कभी कभी बहाना ढूँढता हूँ!

195 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.