#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev

टूटते ख्वाबों के फसाने हैं बहुत!
जिन्दगी में गम के बहाने हैं बहुत!
बस तू ही खफा नहीं है अंजाम से,
शमा-ए-चाहत के परवाने हैं बहुत!

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तेरी याद न आए तो फिर रात क्या हुई?
तेरा दर्द न आए तो फिर बात क्या हुई?
पलकों में अभी अश्क भी आए नहीं अगर,
तेरे ख्यालों से फिर मुलाकात क्या हुई?

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तेरी याद आज भी मुझको रुलाती है!
तेरी याद आज भी मुझको सताती है!
भूलना मुमकिन नहीं है तेरे प्यार को,
तेरी याद आज भी मुझको बुलाती है!

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राहे-वक्त में तुम बदलते जा रहे हो!
तन्हा रास्तों पर तुम चलते जा रहे हो!
दूर-दूर क्यों रहते हो जिन्दगी से तुम?
बेखुदी की शक्ल में ढलते जा रहे हो!

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जी रहा हूँ मैं तो अश्कों को पीते-पीते!
जी रहा हूँ मैं तो जख्मों को सीते-सीते!
खोया हुआ सा रहता हूँ चाहत में तेरी,
मर रहा हूँ मैं तो यादों में जीते-जीते!

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मुझसे खता हुई है तुमसे दिल लगाने की!
तुम भी भूल गये हो राहें पास आने की!
फैली हुई दरारें हैं चाहत के दरमियाँ,
कोशिशें नाकाम हैं जख्मों को भुलाने की!

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क्यों तेरी तमन्नाओं से मैं छिपता रहता हूँ?
क्यों अपनी बेबसी को मैं लिखता रहता हूँ?
नाजुक से हैं ख्याल मगर चुभते हैं जब कभी,
जाम की गलियों में अक्सर दिखता रहता हूँ!

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तेरे हुस्न का मुझपर पहरा सा रहता है!
तेरा ख्वाब पलकों में ठहरा सा रहता है!
तड़पाती रहती हैं मुझको यादें हर घड़ी,
तेरा रंग अश्कों में गहरा सा रहता है!

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मेरे नसीब मुझको रुलाते किसलिए हो?
मेरी जिन्दगी को तड़पाते किसलिए हो?
#दूर_दूर सी रहती हैं मंजिलें मुझसे,
रहमों-करम का खेल दिखाते किसलिए हो?

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आज भी यादों का ग़ुबार है दिल में!
आज भी ख्वाबों का संसार है दिल में!
दर्द है जिन्दा अभी जुदाई का मगर,
आज भी चाहत का बाजार है दिल में!

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तेरी मुलाकात मुझे याद आ रही है!
भीगी हुई रात मुझे याद आ रही है!
खोया हुआ हूँ फिर से यादों में तेरी,
शबनमी बरसात मुझे याद आ रही है!

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