#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

तेरी याद में हम रो भी लेते हैं!
तेरे लिए गमजदा हो भी लेते हैं!
जब रंग सताता है तेरे हुस्न का,
खुद को मयकदों में खो भी लेते हैं!

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जब वादों की जश्ने-रात होती है!
ख्वाबों की नजरों से बात होती है!
ढूंढती है सब्र को मेरी जिन्दगी,
जब भी यादों की बरसात होती है!

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अपनी तन्हाई को कबतक सहूँ मैं?
अपनी बेचैनी को किससे कहूँ मैं?
टपक रही हैं बूँदें यादों की मगर,
अश्कों के भंवर में कबतक रहूँ मैं?

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तुमको एक मुद्दत से अपना बना बैठा हूँ!
अपनी उम्मीदों का सपना बना बैठा हूँ!
उलझा हुआ रहता हूँ मैं तेरे ख्यालों में,
तेरी चाहत को दुर्घटना बना बैठा हूँ!

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कभी वक्त से हारा हूँ कभी हालात से!
कभी दर्द से हारा हूँ कभी जज्बात से!
मैं जीत जाता हर बाजी चाहत की मगर,
मैं हारा हूँ तेरी बेरुखी की बात से!

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