#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

आज भी मुझको तेरा चेहरा याद है!

आज भी चाहत का पल सुनहरा याद है!

शर्माती अदाओं का दिल में चुभ जाना,

आज भी तेरे दर्द का पहरा याद है!

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तेरी रुसवाई से हैरान सा रहता हूँ!

तेरी जुदाई से परेशान सा रहता हूँ!

बढ़ती ही जा रही हैं घड़ियाँ इंतजार की,

अपनी तन्हाई में वीरान सा रहता हूँ!

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