#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev

मुझे तेरी मुलाकात याद रहती है!

तेरी नजरों की बात याद रहती है!

आज भी तड़पाती हैं तेरी अदाऐं,

तेरे ख्यालों की रात याद रहती है!

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कौन मेरी तन्हाई में हमारा बनेगा?

नाकामियों के दौर में बेचारा बनेगा!

टूटती मीनार हूँ अपने आशियाने की,

अब कौन इन दीवारों का सहारा बनेगा?

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