#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

तेरी आज भी मुलाकात का असर है!
तेरे ख्यालों की हर बात का असर है!
नींद उड़ जाती है यादों की चोट से,
तड़पाते लम्हों की रात का असर है!

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मैं क्या भरोसा कर लूँ इस ज़हाँन पर?

डोलता यकीन है टूटते इंसान पर!

हर किसी को डर है तूफाने-सितम का,

आदमी जिन्दा है वक्त के एहसान पर!

 

रचनाकार -#मिथिलेश_राय

 

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