#Muktak by Mukesh Kumar Rishi Verma

मुक्तक संसार

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मानव हैं तो मानवता के काम करें,

सत् कर्मों से स्वजनों का नाम करें |

बन  कर  जन – जन के हितकारी –

आओ  जग  में  नव  निर्माण करें ||

 

ईर्ष्या-द्वेष की ड़गर न चल,

प्यार-मुहब्बत में जी पल-पल |

झूंठ-कपट-बेमानी से भला न होगा-

सत्य-अहिंसा से ही हर सवाल हो हल ||

 

लम्हा-लम्हा गुजारा तुम्हारी याद में हमने,

फिर भी पल-पल दगा दिया तुमने |

बड़े हंसी ख़्वाब सजाये थे –

ख़्वाबों की चिता जलाई किसने ?

 

– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर,

फतेहाबाद, आगरा, 283111

 

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