Muktak by Nazum Navi Khan

हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी

आओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभी

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असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,

क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,

संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।

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हरदम तुम बैठे ना रहो -शौहरत की इमारत में।

कभी कभी खुद को पेश करो आत्मा की अदालत में।

केवल अपनी कीर्ति न देखो- कमियों को भी टटोलो।

कभी कभी खुद से बात करो।

कभी कभी खुद से बोलो

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