#Muktak by Nirdosh Kumar Pathak

।शोमू।

 

मेरे  उमड़ते घुमड़ते सवालों  का जवाब  हो तुम ।

मेरी उनीदी वा जागती आखो के ख्वाब  हो तुम ।

 

मेरे तपते मरू भूमि में सुन्दर एहसास हो तुम ।

वा लड़खड़ाते कदमों को थामने

का आस हो तुम।

 

कवि

निर्दोष  कुमार  पाठक

पेन्ड्रा रोड

9893453078

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