#Muktak by Nirdosh Kumar Pathak

‘   जो बुझा ही नहीं  उसे  जलाना कैसा

जो जला  ही नहीं  उसे  बुझाना कैसा

जो हमारा नहीं  उसे  भुलाना कैसा

 

।।।।कवि ।।

निर्दोष

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