#Muktak by Raghvendra Singh

मुक्तक

 

[1]हम मोहब्बत की राहों, में  हैं कम नहीं।

तोड़ दूँ इक कली की,,, तरह हम नहीं।

हमने थामा है दामन,,,, सफर के लिए,

भूल जाऊं तुझे,,,,,,,,, ऐसे हैं हम नहीं।

 

 

[2]हमने तुमको भी अपना,,,,,, बना ही लिया।

प्यार के घूँट दो,,,,,,,,,,, हमने पी ही लिया।

तुम मेरा साथ दे दो,,,,,,,,, या मुँह मोड़ लो,

अपने दिल पर तेरा नाम,,, लिख ही लिया।

 

 

[3]आंसुओं  की  तरह  मैं भी  बहता  रहा।

याद कर कर के मैं खुद ही जलता रहा।

तुम  भी  आई  मगर आग को  दी  हवा,

मैं  अकेला  तपन  में  ही  तपता   रहा।

 

राघवेन्द्र सिंह ‘राघव’

(सीतापुर)

मो. 8874122059

 

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