Muktak by Rakesh Yadav Raj

कुछ दोहे ~

 

मात रेणुका गर्भ में, पलते पालन हार।

परशुराम के नाम से, लिये षष्ट अवतार।। ( 1 )

 

जब जब धरती पर बढ़े, अधर्म अत्याचार ।

तब तब धरती पे लिये,जगपालक अवतार।।( 2 )

 

जमदग्नि ऋषि के यहाँ, परशुराम अवतार।

धन्य धन्य माँ रेणुका, आये तारन हार।। ( 3 )

 

एक हाथ फरसा लिये, दूजे हाथहि वेद।

धर्म बढ़ाये जग सदा, करते नहि वे भेद।। (४ )

 

अन्याय बढ़े जब धरा, बने रहे सब हीन।

न्याय सदा करते रहे, किये क्षत्रिय विहीन ।। ( 5 )

 

मुख मण्डल के तेज से, फैला कीर्ति प्रकाश।

उनके प्रचण्ड क्रोध से, पाते पापी त्रास।। ( 6 )

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