#Muktak by Ram Shukla

लौट आये फिर पनाहों में
क्या कोई ख़ंजर न मिला
या लुट गए बाजारों में
कोई साथी न मिला
मोम सा दिल था मेरा
पाषाण क्यूँ बना डाला
अब तो खामोश हो गयीं हसरत
मोहब्बत ने मुझे गूँगा बना डाला
लौट जा अब तू अपनी दुनियां में
ऐ मोहब्बत तूने मझसे ही मेरा क़त्ल करवा डाला

राम शुक्ला – जाफरगंज (फतेहपुर)
9795198937

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