#Muktak by Ram Shukla

लेकर इक चाह ह्रदय मे नई राह का गठन करें,
तोड़ तिमिर भवबन्धन के इक नई राह का सृजन करें |
खवाबों मे इतनी ताकत ला कि हर क्षण नूतन द्वार खुलें,
परिवर्तन के द्योतक बन अब स्वयं मार्ग को प्रशस्त करें |
भूख भय और जड़ता का अब किंचित भी न स्थान रहे,
तुम गढ़ो नई राह ऐसी जो प्रगति का गुणगान करे

मौलिक रचना – राम शुक्ला – जाफरगंज 9795198937

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