# Dohe by Ramesh Raj

रमेशराज के दोहे

चाकू बोले पेट के अति आकर नजदीक
“तेरी-मेरी मित्रता सदा रहेगी ठीक।”

हम इस खूनी खेल को देखें बारम्बार
गुब्बारों से आलपिन जता रही है प्यार |

मछली के काँटा फ़ँसा, क़तर कबूतर पंख
फूँक रहा वो आजकल विश्व-शांति के शंख।

गर्दन तक आकर छुरी बनती गांधी-भक्त
हंसकर बोले आजकल नहीं बहाऊँ रक्त |
+ रमेशराज

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