#Muktak by Sandeep Saras

एक मुक्तक🔴

 

न हो बेबाक़ तेवर तो भला फिर बोलना कैसा।

 

न सच्ची बात कह पाए लबों को खोलना कैसा।

 

फरेबी  का चरण  चुंबन  कहो स्वीकार  लें कैसे,

 

मुझे  अपनी  फकीरी  में  रईसी  घोलना  कैसा।

 

【 संदीप ‘सरस’ 】

■कवि,साहित्यकार/समीक्षक

■साहित्य सम्पादक-दैनिक राष्ट्र राज्य

■संयोजक-साहित्य सृजन मंच

■पता-मो-शंकरगंज,पोस्ट-बिसवां

जिला-सीतापुर(उ प्र)-(पिन-261201)

■मोबा【9450382515】【9140098712】

 

 

 

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