#Muktak by Sandeep Saras

एक मुक्तक

अंतर के आंदोलित स्वर क्यों जीवन से सम्बद्ध हुए है।

स्थितिप्रज्ञ हुआ हूँ सम्मुख आज खड़े प्रारब्ध हुए हैं।

माते कुंती आज पुत्र का सम्बोधन स्वीकार्य नहीं हैं,

सूतपुत्र के अभिशापों से मृत्यंजय आबद्ध हुए हैं।

संदीप सरस, बिसवां
मो 94502382515

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