#Muktak by Sandeep Saras

बेबाक

 

ऐ समंदर तू  बता क्या  प्यास को  तूने जिया है।

 

ऐ अधर तू  ही बता  क्या हास को तूने जिया है।

 

अनवरत जो दे रही जीवन बसी जो धड़कनों में,

 

ऐ हृदय तू  ही बता  उस स्वांस को तूने जिया है।

 

संदीप सरस,बिसवां

9459382515

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