#Muktak by Sandeep Saras

बेबाक

 

मेरे दिल को  मेरे जज़्बात  छल न जाएँ कहीं।

 

चन्द अल्फ़ाज लबों से  फिसल न जाएँ कहीं।

 

सेंक   लेता   हूँ  मगर   एहतियात  रखता  हूँ,

 

इन अलावों  से  मेरे  हाथ  जल न जाएँ कहीं।।

 

बस  यही  सोंच के  मेले  में  नहीं ले जाता,

 

खिलौने  देख  के  बच्चे  मचल न जाएँ कहीं।।

 

संदीप सरस

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