#Muktak by Sandeep Vashishtha

कलम वही होती है यारों जो दुनियाँ को दंग करे,

अपनी मर्यादा बिसराकर नहीं किसी को तंग करे।

देश-धर्म जब खतरे में हो उदासीन ना बैठी हो,

दुश्मन की छाती पर चढकर बस दुश्मन से जंग करे।।

 

संदीप वशिष्ठ

105 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Whatspp dwara kavita bhejne ke liye yahan click karein.