#Muktak by Saurab Dubey Sahil

मुक्तक ~

हे माँ वीणाबादिनी वर दे ,
बने जीवन ज्ञानमय कुछ कर दे,
होता रहे प्रस्फुटित नूतन सृजन ,
हे माँ हंसवाहिनी सब मंगल कर दे ।

~ सौरभ दुबे ” साहिल ”

~ शायरी ~

रास्ते तूने ही अलग चुने ,
और तू ही उलझ रहा हैं ,
हम तो दिन की तपन में भी नम हैं ,
जाने क्यूँ तू रातों को सुलग रहा हैं ।

~ सौरभ दुबे ” साहिल “

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