#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

~ मुक्तक ~

 

अँधेरा दिलों में था और हम ,

सारे जहाँ में दीपक जलाते रहे,

दर्द जिनसे भी मिला और हम

हरदम उन्ही को अपना बताते रहे ।

 

~  सौरभ दुबे  ” साहिल ”

 

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