#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

~ मुक्तक ~

ठहरता है जब भी मेरा मन
दरिया के पानी सा,
जाने क्यों तुम हरवार कंकड
मार देते हो ।

जब भी तुम्हे भूल जाने को
जी चाहता है ,
जाने क्यों सपनों में आकर,
निहार देते हो ।

~ सौरभ दुबे “साहिल “

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