#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

~ मुक्तक ~

इतना ना सँवरियेगा जनाब ,
कहीं नजारे ही ना बदल जायें ,
निगाहें चाँद को आसमाँ मे ढूढें ,
चाँद जमीं पे ही ना निकल आये ।

~ सौरभ दुबे ” साहिल “

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