#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

~ मुक्तक ~

नदिया कितनी दूर क्यों ना बहे ,
उसे मुक्ति सागर में ही मिलती हैं ,
इन्सान चाहे जितना धन वैभव अर्जित कर ले,
उसे वास्तविक सुख शांति घर में ही मिलती है ।

~ सौरभ दुबे ” साहिल “

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