#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

चंद खिली कलियाँ डाली का भार नहीं होती ,

सूखी हुई कलियाँ कभी फूलों का हार नही होती ,

सफलता और असफलता तो जीवन के दो पहलू हैं ,

कुछ असफलताएं पूरे जीवन का आधार नहीं होती ।

 

सौरभ दुबे  ” साहिल ”

किशनी मैनपुरी  (यूपी )

 

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