# Muktak by Shayar Himanshu Suthar

समझा होता अगर उन्हें भी रौशनी का चराग,तो किसी सदन में कभी तम नहीं होता
रखा होता उसे अपनी अनमोल ज़ागीर समझकर,तो बोझ का कभी भ्रम नहीं होता
काश होती बेटियों को भी इज़ाज़त सदा अपने माँ-बाप को पास रखने की
तो आज विश्व में एक भी वृद्धाश्रम नहीं होता
शायर हिमांशु सुथार

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