#Muktak by Sunil Samaiya hasya Kavi

बात ऐसे भी हो सकती है

एक मुक्तक

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सियासत की, अदावत मे, बगावत पर, उतर आये

नजाकत से ,गले मिलकर ,शिकायत पर, उतर आये

स्याह पर्दा, चढ़ाकर ऑख पर ,क्या देख आये तुम ?

कलम सर करने वाले सब, शराफत पर उतर आये?

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कवि ¤सुनील समैया 8120384261

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