# Muktak by Vijay Narayan Agrwal

-:मुक्तक:-

यौवन का  दिन  पास नही है,

बचपन  सा  उल्लास  नही है,

बूढ़ “भ्रमर” को कौन सम्हाले,

जीवन  का  विश्वास  नही है।।

 

सुनने  में ऐसा  आया, लगता है वहॉं मेला,

जैसी  हो “भ्रमर” करनी  वैसा  फँसे झमेला,

पर कोई न सोंच पाया इस भूलोक की व्यथा,

जहँ  आना  हमें  अकेला, जाना हमें अकेला।।

 

विजय नारायण अग्रवाल” भ्रमर”

+919453510399

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