#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

मुक्तक:–1

किसी में प्यार चोखा है ,

किसी का हार धोखा है

किसी को कुछ नही मिलता,

समय को किसने देखा है।।

2

चार दिन की जिन्दगी,काहे को हैरान,

गुजर  चैन से  कीजिये,एै बन्दे नादान,

सुख चाहे तो मुस्कुरा,दुख की घटा मलीन,

लाख बुराई जग करे, गति इश्वर पहचान।।

दोहा:–

आकुलता  की  सतह  पर ,सब हैं एक समान।

लौकिक तृष्ना मनुज मन.अरु समुद्र शमशान।।

 

विजय नारायण अग्रवाल ‘भ्रमर’ रायबरेली

 

 

 

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