#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

दोहे:–

 

परिवार मित्रअरु बंदगी,दिखती ठॉव कुठॉव।

लेकिन तरुवर छल बिना,दे विन मॉगे छॉव।।

 

आकुलता  के   द्वार पर ,प्रश्न  करो  न  कोय ।

द्वेश निखद जग जायगा,मन का आपा खोय।।

 

हमें  ना  नीति  गहनी है ,

हमें  ना  जीत  गहनी  है

सदा आुकुल करे जीवन,

वही बस प्रीति गहनी है।।

 

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