#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

दोहा:–

 

दे प्रकाश इतना मुझे, करुणामय भगवान।

चाहत रस की पूर्ण कर,तुझे सकूँ पहचान।।

 

मुक्तक:–

 

जगत प्रकाशित कर रहा,सूर्य ग्रहों के साथ,

संसोधित कर दो आत्मा, हे नाथों के नाथ,

करुणा -किरपा के विना,होय न तमसा दूर,

रति गति महिमा बहुमुखी,करो नभावअनाथ।।

 

‘भ्रमर’

 

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