#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

दोहा:–

 

सत्य  मार्ग को छोड़कर ,भाव भरो नहिं हीन।

जग दुख का साथी नही,हरपल करो कुलीन।।

–:कुन्डली छन्द:–

दो दो कुल का भार ले,नारि जगाती प्रीति,

लेकिन अब देखी गयी,जग में उल्टी नीति,

जग में उल्टी  नीति, कामना  हुयी  प्रचंडा,

पुलिस  दिखाये  भीति,बता कानूनी फंदा,

कहत’भ्रमर’कविराय,धारणा संयत कर लो,

नहिं छवि भूमि गिराय,पड़ेगें डन्डे दो दो।।

 

रचयिता प्रेषक:–

विजय नारायण अग्रवाल ‘भ्रमर’ रायबरेली

मो०±919453510399

 

 

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