#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

शेर:–

जिस फ़साने में मेरे इलाही न हों,

उस फ़साने से मेरा नहीं वास्ता।।

 

मुक्तक:–

 

कुछ लोग मिले मुझको ,एहसास ठिकाने से,

सुरधाम  गयी  गणिका ,हरि नाम  सुनाने से,

जिज्ञासा  पालते  ही , आकुल  हुयी थकान,

उकसाय  रही मन्सा ,निष्ठा  के  खजाने  से।।

किरपालु बनी औषधि , कर्तव्य  निभाने से।।

 

विजय नारायण अग्रवाल ‘भ्रमर’ रायबरेली

 

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