#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

दोहा:–

 

जीवन में बन्धुत्व को,लेना हृदय लगाय ।

जैसे  कलि – मलि हरनी,गंगा रहे नहाय।।

 

मुक्तक:–

 

ताकत  से  समस्यायें  हल  नही होतीं,

बुराई  के  साथ  में अकल नहीं  होती,

समान दृष्टि  नीति  कर  देती  व्याख्या

जोआज हैं दिखती वो कल नही होतीं।।

 

‘भ्रमर’

 

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