#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

शेर :–

जिसका ज़माले इश्क़ से,सरोकार नही है।

उस भावना का  भाव  से, दीदार नही है।।

दोहा:–

आदिल वाहिद ताज गुरु,सख इन्सॉं दरवेश।

यारी  -दरिया – बुल्ले  में, कारे -खु़शरो शेष।।

 

मुक्तक:–

छाई  जहॉं में  रोशनी, दाता के प्यार की,

ले  लो दुवायें  तुम भी ,परवर  दिगार की,

जिसने किया है फैसला,लूटेंगे ‘भ्रमर’ को,

दोज़ख़ में जा रही है,घडी़ उस बहार की।।

 

‘भ्रमर’

 

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