#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

दोहा:–

 

अधिकउम्र का बृद्ध यदि,कर्म करेअविराम।

समझें  रोटी  चाहिये , खड़ी  गरीबी  वाम।।

 

मुक्तक:–

 

उनको दे दो जिन्दगी, जो करते फरियाद,

राग द्वेश को छोड़कर,तुमको करते याद,

बिषय भोग सन्सार में, अजमाते हैं जोर,

व्यर्थ वेदना साथ ले,रचते निगुण विबाद।।

 

विजय नारायण अग्रवाल ‘भ्रमर’ रायबरेली

 

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