#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

मुक्तक:-

1

मनयोग का बिषय है,

उपयोग  से  उदय है,

पुरुखों की मानों शिक्षा,

पल मात्र में प्रलय है।।

2

जर्रे – जर्रे में  ख़ुदा की, रोशनी अविराम  है,

रागिनी से  सुबह  होती ,चॉंदनी से शाम  है,

परअलग तस्बीरदिखती,हुश्न के बाजार की,

चाह  को राहत  नहीं ,चतुराई में ईनाम है।।

 

‘भ्रमर’ रायबरेली

Leave a Reply

Your email address will not be published.