#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

दोहा:–

हिय हुलास परमात्मा,देता आतम ज्ञान।

वैसे  जैसे  प्रेम  में,छिपा हुआ कल्यान।।

 

मुक्तक:–

स्वयं को पहचान लेने से,

बड़ा कोय ज्ञान नही है,

जो अहम् को उच्च स्थान दे

वह तो इन्सान नही है,

बुराई कर  कोई आदमी,

अमीर  हो नहीं सकता,

लेकिन क्षमा करने से बडा़,

जगमें कोय दान नही है।।

 

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