#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

—:भगवान:—

मुक्तक.  1

भ. क्ती से जो भाव निकाले,

ज्ञान का करे समावेश,

ग.णमान्य व्यक्ति बन जाये वो,

जो त्यागे मद आवेश,

वा  चा- मनसा -कर्मणा से,

बना “भ्रमर” परिवेष,

न. श्वर शरीर  को ऐसा समझे,

जैसे बदले अपना वेष।।

2

भ. व से वह पार लगाये,

विना मान आवेश,

गं   गा ज्ञान की एैसी बहाये,

नित देय नया सन्देश,

वा  णी से वह राह दिखाये,

बिना किसी लवलेश,

न.  श्वर शरीर को एैसा बदले,

जैसे बदला जाये वेष।।

 

विजय नारायण अग्रवाल ‘भ्रमर’

 

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