#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

मुक्तक:—

1

अनुराग राग का नाता है

बस प्रानी चैन न पाता है,

यदि चलता वह सहनिष्ठा ले,

आत्म द्वार खुल जाता है।।

2

वैराग्य विकलता लाता है,

नवजीवन ज्योति जगाता है,

छुट जाती रस काम कामना,

जीव मोक्ष पा जाता है।।

3

गुरुबत में किसी का ,

कोई साथ नही देता,

नयनों  में भरे अॉंसू ,

कोई  बॉंट नही लेता,

मायूस ज़दा रहना ,

कोई अकलमन्दी नही,

ईश्वर के सिवा बढ़ा ,

कोई  हाथ नही देता।।

 

‘भ्रमर’ रायबरेली

 

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