#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

स्वतंत्रता दिवस की मंगल
कामनाओं सहित
दोहा:–

माया के वशिभूत जग,
असुर देव ब्रह्मादि।
बन्दउँ पद श्री राम के,
कारण करण अनादि।।

मुक्तक:–

अज्ञानी विज्ञानी रसिक,
नहिं ढूँढतअभिशाप,
अमानवीय अधिकार ले,
यौवन करत अलाप,
सुई डोर सी धर्मिता,
रचती रूप अनेक,
आकुल माला प्रेम की,
दुख सहते माँ बाप।।

रचयिता:–
विजयनारायणअग्रवाल’भ्रमर’
रायबरेली उ०प्र०

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