#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

हंसती  और  हंसाती   दुनिया,

पग पग जाल बिछाती दुनिया ,

बिषय  भेद  का  मर्दन  करके,

दुख़ औ दाह  दिलाती दुनिया ।।

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गुरुबत में  सारे रिस्ते,गुलजार नही होते,

कैसे कहूं कि दिल के, दिलदार नही रोते,

हर्षितभ्रमरजवानी,फितरत से जहर बोती,

बेकार की फजीहत,भव पार  नही होते ।।

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नेह घटाना ठीक नही है
द्वेश बढाना ठीक नही है

मिले शरन यदि प्रभु चरनों की

समय गंवाना ठीक नही है

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