#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

अश्क हसते नही अश्क रोते नही,

अश्क निरमूल नजरों से होते नही,

पर उन्हें क्या पता क्यूं तडपता भ्रमर

द्वेष- तृष्णा  सरलता पिरोते नही॥

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अश्क कैसे भी हों, हैं मरम के घडे ,

कंठ कौशल नही ,पर सुमन के जडे,

जब भ्रमर ने निहारी,करुण की दशा,

उनको दीनो की कुटिया मे देखा खडे ।।

 

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