#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

दोहे:-

जीवन में सन्देह का,जब हो उदय अपान,

समझो नारद आ गया,लेकर एक तूफान।

 

भौतिक भूत शरीर लखि,क्यूं जागा अज्ञान ।

भ्रमर” कमाले सत्य की,माया अन्तर ध्यान ।।

 

क्रोध किये पीड़ा बढ़े,दिन दिन घटेशरीर।

ठेस लगे सम्मान को,बढ़े पराई पीर।।

 

कर पायें कुछ अच्छा ” !!

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