#Nazm by Badshah Rahi

उन्वान–पैसा

बन्द-1

तारीख़  कह  रही है  ये कहते हैं  अहले फ़न

पूछो   ज़मीं  से   बोलेगी   बोलेगा   ये गगन

क़ायम  है अब   भी  दहर  में  पैसे  का बाँकपन

पैसे   से   आदमी   का   बदलने   लगा चलन

आगँन में जिसके आज भी पैसे की धूप है

बदला  हुआ  उसी  का  ज़माने में रूप है

बन्द  2

पैसे  का  इस  जहाँ  में  असर  देखिये  जनाब

बदरंग    हथेली    पे    क़मर   देखिये  जनाब

पैसे  को  आज   चाहे   जिधर  देखिये जनाब

ना  मोतबर   भी   इससे   हुए  मोतबर जनाब

बूढ़ा भी है  अगर  तो  रवानी  दिखाई दे

पैसे  से  आदमी  में  जवानी  दिखाई  दे
बन्द-3

पैसा शऊरो फ़िक्र  को  ताज़ा  वक़ार  दे

पैसा जो पास आए तो क़िस्मत सवाँर दे

ढ़लते हुए शबाब को फिर  से  निखार दे

पैसा सकूँन ज़ेहन को दिल  को क़रार दे

पैसा है जिसके  पास  वही कामियाब है

पैसा अगर  नहीं  है तो  ख़ाना ख़राब है

बन्द-4

पैसे  की  रेल  पेल  में  ऐसा  कमाल  है

इसमें  कहीं उरूज  कहीं  पर ज़वाल  है

इसकी हर इक  तरंग  में ऐसी  उछाल है

पैसे  से आदमी में  वो  जाहो जलाल  है

लालच  ने  उसकी राह को मुश्किल बना दिया

इक रहमदिल  को पैसे ने  क़ातिल  बना दिया

बन्द-5

दामन है  जिनके  हाथ  में  पीराने   पीर का

छुप छुप के वो भी करते हैं सौदा  ज़मीर का

ये   लहज-ए-अज़ीम  नहीं   है   अमीर का

राही ये मुझको लगता है लहजा   फ़क़ीर का

पैसे का बस इसीलिए सबको ख़याल है

पैसा अगर नहीं है  तो  जीना  मोहाल है

बादशाह राही-ग़ाज़ीपुर उ0 प्र0
मो0-09415281467
09648448072

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